देखना चाहता था अपने बालपन में भोगे हुए मैदान, गलियाँ सटे हुए मकान खंडहरों के अँधेरे कोनों में हिलकते... देखना चाहता था अपने बालपन में भोगे हुए मैदान, गलियाँ सटे हुए मकान खंडहरों के अँध...
क्या आज़ादी उस धुएँ में क्या आज़ादी उस धुएँ में
कुछ बातें करनी है कुछ बातें करनी है
किराने की दुकान से कुछ दूर मैंने उसे कुछ सिक्के गिनते देखा। एक गरीब बेसहारा बच्चे की किराने की दुकान से कुछ दूर मैंने उसे कुछ सिक्के गिनते देखा। एक गरीब बेसहार...
देखा समय को जब भी देखा अस्त व्यस्त और मनमौजी देखा। देखा समय को जब भी देखा अस्त व्यस्त और मनमौजी देखा।
मैंने जी हैं ज़िंदगी भी, और ज़िन्दगी को जीते जी मौत में बदलते हुए भी देखा है ।। मैंने जी हैं ज़िंदगी भी, और ज़िन्दगी को जीते जी मौत में बदलते हुए भी दे...